घर बास के दुबे (द्विवेदी )की वंशावली

gharwas dubey bansabali
(घर बास दुबे (द्विवेदी)इटावा )
सेवा राम दुबे 
जो कि इटावा के रहने वाले थे और नवाबगंज में आकर बसे उनके परिवार की वंशावली कुछ इस प्रकार है 

घरबास के दुबे परिवार एक प्रमुख कान्यकुब्जों ब्राह्मण परिवार है, जो इटावा जिले में स्थित है। इस परिवार के लोग मुख्य रूप से द्विवेदी (दुबे) जाति से संबंधित हैं और उनकी उत्पत्ति इटावा टीला मोहल्ले से हुई है।

इस परिवार के लोग मुख्य रूप से कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और उन्होंने समाज में एक प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त किया है। घरबास के दुबे परिवार के लोग अपने पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं और समाज सेवा में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।

घरबास के दुबे परिवार के बारे में कुछ प्रमुख बातें:
- यह परिवार द्विवेदी (दुबे) जाति से संबंधित है।
- इस परिवार का जन्म इटावा  टीला मोहल्ले  से हुई है।
- इस परिवार के लोग कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं।
- इस परिवार के लोग समाज सेवा में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।

क्या आप घरबास के दुबे परिवार के बारे में और जानना चाहते है
घरबास के दुबे परिवार के बारे में और जानने के लिए, आप उनके इतिहास, उनकी उपलब्धियों, और उनके समाज में योगदान के बारे में जानना चाह सकते हैं।

घरबास के दुबे परिवार का इतिहास बहुत पुराना है और वे अपने पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। इस परिवार के लोग मुख्य रूप से कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और उन्होंने समाज में एक प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त किया है।

घरबास के दुबे परिवार के कुछ प्रमुख व्यक्तियों में शामिल हैं:
- सेवा राम द्विवेदी: इस परिवार के पूर्वज
- दयाराम: सेवा राम द्विवेदी के पुत्र
- कवलीराम: सेवा राम द्विवेदी के पुत्र
- हरीराम: सेवा राम द्विवेदी के पुत्र

क्या आप घरबास के दुबे परिवार के किसी विशिष्ट व्यक्ति के बारे में जानना चाहते हैं या फिर उनके परिवार के इतिहास के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं? तो उनकी वंशावली इस प्रकार है 

स्व.श्री रामदयाल द्विवेदी राजवैद्य
यह छवि घरबास के दुबे  कान्यकुब्जों ब्राह्मणों की है (जो कि इटावा, उत्तर प्रदेश के निवासी हैं) का एक विस्तृत वंशवृक्ष (Family Tree) प्रस्तुत करती है

## पारिवारिक इतिहास

### प्रस्तावना
घरवास दुबे परिवार कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज से संबंधित है और इसका गोत्र उपमन्यु है। यह वंश अपने धार्मिक संस्कारों, पारिवारिक एकता और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए जाना जाता है। परिवार की मूल जड़ें उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद से जुड़ी हुई हैं। समय के साथ यह परिवार विभिन्न स्थानों पर फैल गया, लेकिन आज भी अपने पूर्वजों की परंपराओं और संस्कारों को संजोए हुए है।

भारत की संस्कृति में परिवार और वंश परं

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### आदिपुरुष – पंडित सेवाराम( दुबे )द्विवेदी 

घरबास दुबे वंश के आदिपुरुष **पंडित सेवाराम दुबे** माने जाते हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद में हुआ था। वे एक सम्मानित, धार्मिक और समाज में प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। उनके व्यक्तित्व में सादगी, परिश्रम और समाज के प्रति समर्पण की भावना स्पष्ट दिखाई देती थी।

समय के साथ उन्होंने इटावा से निकलकर उन्नाव जिले के **नवाबगंज** क्षेत्र में अपना निवास स्थापित किया। नवाबगंज में बसने के बाद उन्होंने अपने परिवार को संगठित किया और सामाजिक जीवन में भी सम्मान प्राप्त किया।

उनकी मेहनत, आचार-विचार और समाज सेवा के कारण उनका परिवार क्षेत्र में एक सम्मानित परिवार के रूप में जाना जाने लगा। सेवाराम दुबे जी की यही परंपरा आगे की पीढ़ियों में भी दिखाई देती है।

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### प्रारम्भिक पीढ़ियाँ

सेवाराम दुबे (द्विवेदी)जी के बाद उनके पुत्र **कवलीराम दुबे** ने परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने अपने पिता की शिक्षाओं और संस्कारों को अपनाते हुए परिवार को एकजुट बनाए रखा।

उनके बाद **दयाराम दुबे** ने परिवार की जिम्मेदारियों को संभाला। परिवार की परंपराओं और संस्कारों को बनाए रखते हुए उन्होंने अगली पीढ़ी को अच्छे संस्कार दिए।

दयाराम दुबे के पुत्र **हरिराम दुबे** ने भी परिवार की प्रतिष्ठा को बनाए रखा। उनके समय में परिवार का विस्तार हुआ और वंश की शाखाएँ आगे बढ़ने लगीं।

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### हरिराम दुबे( द्विवेदी)की संतति

हरिराम दुबे के दो पुत्र थे –

1. भिखारी लाल दुबे
2. मदारी लाल दुबे

इन दोनों से परिवार की अलग-अलग शाखाएँ आगे बढ़ीं और समय के साथ परिवार का विस्तार हुआ।

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### भिखारी लाल दुबे( द्विवेदी) की शाखा

भिखारी लाल दुबे जी के चार पुत्र हुए –

1. अयोध्या प्रसाद 
2. लालता प्रसाद 
3. दुर्गा प्रसाद 
4. शंकर प्रसाद 

इन चारों भाइयों ने अपने परिवारों के माध्यम से वंश को आगे बढ़ाया और समाज में अपनी पहचान बनाई।

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### लालता प्रसाद द्विवेदी की पीढ़ी

भिखारी लाल दुबे के पुत्र **लालता प्रसाद दुबे** से परिवार की एक बड़ी शाखा आगे बढ़ी। उनके दो पुत्र थे –

1. रामदत्त 
2. रघुनंदन 

इन दोनों भाइयों ने भी परिवार की परंपरा को बनाए रखा और आगे की पीढ़ियों को संस्कार दिए।

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### रामदत्त द्विवेदी की संतति

रामदत्त द्विवेदी के तीन पुत्र हुए –

1. महाबली 
2. विशेश्वर प्रसाद 
3. भगवंत 

इन तीनों भाइयों ने अपने-अपने परिवारों के माध्यम से वंश को आगे बढ़ाया।

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### विशेश्वर प्रसाद दुबे की पीढ़ी

विशेश्वर प्रसाद दुबे की संतति में पाँच पुत्र हुए –

1. शिवबालक 
2. रामदयाल 
3. कृष्ण दत्त 
4. जय नारायण 
5. रामशंकर 

इन पाँचों से परिवार की कई शाखाएँ आगे बढ़ीं और वंश का विस्तार हुआ।

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### आगे की पीढ़ियाँ

शिवबालक दुबे के दो पुत्र –
धन्वंतरि दुबे और धीरेंद्र दुबे।

रामदयाल दुबे के पुत्र –
हरिशंकर दुबे।

हरिशंकर के पुत्र –
रामनिवास , ज्ञानेश और हनुमान शरण ।

कृष्ण दत्त दुबे के चार पुत्र –
धर्म गुरु , धर्मेन्द्र , राजेन्द्र और सुशील ।

जय नारायण द्विवेदी के दो पुत्र –
लल्लू चुन्नी और रामकुमार ।

रामशंकर दुबे के दो पुत्र –
रामलखन दुबे और मदन मोहन दुबे।

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### परिवार का विस्तार

समय के साथ घरबस दुबे वंश के सदस्य केवल एक ही स्थान तक सीमित नहीं रहे। शिक्षा, रोजगार और अन्य कारणों से परिवार के लोग अलग-अलग स्थानों पर जाकर बस गए।

आज इस परिवार के सदस्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों और अन्य राज्यों के शहरों जैसे –
नवाबगंज (उन्नाव), इटावा, कानपुर, लखनऊ,शाहजहांपुर, हरदोई, गोंदिया, जबलपुर और  आदि में निवास कर रहे हैं।

हालाँकि स्थान अलग-अलग होने के बावजूद परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम, सम्मान और पारिवारिक संबंध आज भी मजबूत बने हुए हैं।

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### पारिवारिक परंपरा और संस्कार

घरबास दुबे (द्विवेदी) वंश की पहचान केवल उसकी वंशावली से ही नहीं बल्कि उसके संस्कारों से भी है। इस परिवार में धर्म, शिक्षा, मेहनत और समाज के प्रति सम्मान की भावना पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।

परिवार के बड़े-बुजुर्ग हमेशा अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने और परिवार की प्रतिष्ठा बनाए रखने की शिक्षा देते रहे हैं। यही कारण है कि आज भी इस परिवार के सदस्य अपने पूर्वजों की परंपराओं और मूल्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।

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### निष्कर्ष

इस प्रकार **घरबास दुबे (द्विवेदी)वंशावली** का इतिहास कई पीढ़ियों से चलता आ रहा है। इटावा से प्रारम्भ होकर नवाबगंज उन्नाव में स्थापित यह परिवार समय के साथ विभिन्न स्थानों पर फैल गया, परंतु अपने मूल संस्कारों और पारिवारिक परंपराओं को आज भी संजोए हुए है।

यह वंशावली केवल नामों का क्रम नहीं बल्कि उन पूर्वजों की याद और सम्मान है जिन्होंने अपने परिश्रम, संस्कार और आचरण से इस परिवार को एक पहचान दी। आने वाली पीढ़ियों के लिए यह इतिहास प्रेरणा का स्रोत रहेगा और उन्हें अपने पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता रहेगा।

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**घरबस दुबे वंश के सभी पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक नमन।**

Comments

  1. Kya aur bhi bansabli mil sakti hai gharwas ke Dubey ki bhai

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  2. Gharwas ke Dubey ki bansabli aur chahiye bhai mil jayegi

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  3. Ye bansabli mere kuch parivar se mil rhi hai kya bhai aur mil sakti hai

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  4. Bhai muje ye bansabli mil sakti hai puri

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  5. Me bhi Gharwas ka dubey hu bhai

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